भारत में FIR एक बहुत ही जरुरी कानूनी दस्तावेज़ होते है। जब भी किसी अपराध की सूचना पुलिस को दी जाती है, तो पुलिस उसे FIR के रूप में अपने पास दर्ज करती है। लेकिन कई बार लोगो को ये जानने की उत्सुकता होती है कि FIR cancel कैसे होती है , क्या इसे हटाया जा सकता है, और इसका सही तरीका क्या है।
इस लेख में हम समझेंगे :-
FIR होती क्या है ?
FIR को रद्द कैसे किया जा सकता है ?
पुलिस की क्या भूमिका होती है ?
High Court की क्या भूमिका होती है ?
समझौते के मामलों में क्या परिणाम होता है ?
पूरा legal process एक-एक करके समझेंगे ?
FIR होती क्या है?
FIR का मतलब होता है First Information Report। यह एक लिखित में लिया गया दस्तावेज़ होता है जिसे पुलिस तब दर्ज करती है जब किसी व्यक्ति के साथ कोई गंभीर अपराध घाट चूका हो या घंटे वाला हो जिसकी सूचना पुलिस को दी जाती है
यह कुछ FIR से जुडी कुछ मुख्य बाते :-
FIR CrCP ( Code of Criminal Procedure ) की धारा 154 के तहत दर्ज किया जाता है
FIR के दर्ज होते ही पुलिस अपनी जांच को शुरू कर देती है
फिर जांच से पुरे case की शुरुआत होती है
क्या FIR को रद्द किया जा सकता है ? यह सवाल सबसे ज्यादा जरूरी है
हाँ, FIR cancel हो सकती है, लेकिन सीधे तरीके से नहीं FIR को तकनिकी तोर से रद्द नहीं किए जा सकता ,बल्कि इसे: तकनिकी तोर से कंप्लेंट वापस ली जा सकती है
FIR को रद्द करने के तरीके :
भारत में FIR खत्म करने के तीन मुख्य तरीके हैं :-
समापन रिपोर्ट
समझौता कर लेना
High Court से FIR को रद्द करवाना
समापन रिपोर्ट क्या होती है?
पुलिस जांच के दौरान कोई सबूत नहीं मिलता या शिकायत झूठी होती है आरोपी के खिलाफ केस नहीं बनता है तो पुलिस कोर्ट में Closure Report दाखिल करती है।
समापन रिपोर्ट कब दाखिल की जाती है ?
जब आरोपी नहीं मिलता है
जब मामले को गलत रूप से समझा गया हो
जब शिकायत झूठी दर्ज की जाती है या झूठी हो
1. इसका क्या प्रक्रिया`: पुलिस जांच के तहत अंदर तक जाती है सबूत को इकट्ठा करती है केस के कमजोर होने पर रिपोर्ट को बनाती है फिर पुलिस उस रिपोर्ट को कोर्ट में भेजती है उस रिपोर्ट के माध्यम से कोर्ट निर्णय लेता है की FIR रद्द की जाएगी या नहीं ! में आपको सीधे सब्दो में बता दू की FIR technically हटती नहीं है , केवल केस बंद हो जाता है।
2. Compromise से FIR ko Cancel किया जा सकता है
Compromise क्या होता है ? Compromise से FIR को कैसे Cancel किया जा सकता है जब शिकायत करने वाला और आरोपी अपराध करने वाला आपस में समझौता कर लेते हैं, तो इसे समझौता कहते हैं।
क्या हर केस में compromise possible है! - नहीं
Compromise इन मामलों में संभव है:
पारिवारिक विवाद ( family problems )
पति-पत्नी के मामले ( husband - wife problems )
व्यापारिक विवाद ( business dispute )
छोटी-मोटी लड़ाई ( small fights )
Compromise इन मामलों में नहीं होता:
हत्या (murder)
बलात्कार (rape)
गंभीर अपराध ( serious crime )
समाज के खिलाफ अपराध ( crime against the society )
Compromise के होने के बाद क्या करें?
अगर समझौता हो गया है दोनों तरफ से , तब भी: आपको High Court जाना होगा FIR को रद्द करवाने के लिए
3. High Court से FIR रद्द कैसे होती है?
कानूनी रूप से यह आधार है की:- CrPC की धारा 482 के तहत High Court के पास विशेष अधिकार होते हैं जिससे High Court FIR को रद्द कर सकती है।
FIR रद्द करने के step-by-step तरीके
वकील नियुक्त ( Hire ) करें- एक अनुभवी criminal lawyer का होना बहुत जरूरी है।
सबसे पहले Petition फाइल करें - High Court में FIR रद्द petition जमा की जाती है। -
Petition में बताया जाता है FIR झूठी दर्ज कराइ गयी है इस case से मिलते जुलते कोई सबूत नहीं है दोनों तरफ से समझौता हो गया है कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है
इसके पीछे के कारण लिखे जाते हैं
कोर्ट एक Notice जारी करती है - कोर्ट पुलिस और complainant को नोटिस भेजती है।
court में सुनवाई होती है- दोनों पक्षों की बात को सुना जाता है।
फिर कोर्ट अपनी ओर से फैसला करती है - अगर court संतुष्ट हो जाती है दोनों के compromise को मधय नज़र रखते हुए फिर कोर्ट FIR को रद्द कर देती है
High Court इन स्थितियों को नज़र में रखते हुए FIR को रद्द कर सकती है:-
FIR के झूठे होने पर
कोई ठोस सबूत ना मिलने पर
Civil dispute को criminal बना दिया गया हो
दोनों पक्षों में समझौता हो गया हो
कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा हो
कौन FIR को Cancel नहीं कर सकता है ?
पुलिस FIR को cancel नहीं कर सकती है।
शिकायतकर्ता भी FIR को Cancel नहीं कर सकते है।
मजिस्ट्रेट भी फिर को कैंसिल नहीं कर सकता है।
केवल High court ही FIR को कैंसिल कर सकती है
FIR को Cancel होने में कितना समय लग सकता है?
समापन रिपोर्ट को रद्द होने में 3 से 12 महीने लग सकते है
High Court को FIR रद्द करने में 1 से 6 महीने लग सकते है
जटिल केस ( Complex Case) को Cancel होने में 1 साल या उससे भी अधिक समय लग सकता है
FIR को Cancel कराने में कितना खर्चा आ जाता है?
यह निर्भर करता है: वकील की फीस पर, केस के जटिलता ( complexity ), कोर्ट के स्थान पर
अनुमान लगाया जाये तो खर्चा कम से कम ₹20,000 और ज्यादा से ज्यादा ₹2,00,000+
उदाहरण
1: पारिवारिक विवाद ( Family Dispute )
पति-पत्नी में विवाद हुआ फिर बाद में दोनों की तरफ से समझौता हो गया
फिर High Court ने FIR को रद्द कर दिया
2: व्यापारिक विवाद ( Business Dispute )
Loan issue जैसे परेशानी को criminal केस बना कर बताया गया
फिर कोर्ट ने FIR quash ( रद्द ) कर दिया
सबसे ज्यादा जरूरी और महत्वपूर्ण कानूनी शब्द जो कानून भी भाषा में बोले जाते है :-
FIR को रद्द करना
केस बंद करने के लिए रिपोर्ट
समझौता कर लेना
गंभीर अपराध
FIR Cancel कराने से पहले यह कुछ ध्यान देने वाली बातें
क्या case गंभीर है?
क्या समझौता असली है?
क्या सबूत कमजोर हैं?
क्या High Court जाना जरूरी है?
यह कुछ आम गलतिया जो व्यक्ति करते है :-
पुलिस से FIR हटवाने की कोशिश करना
सीधे complainant से FIR वापस लेने को कहना
नकली समझौता करना
गलत कानूनी सलाह लेना
निष्कर्ष ( conclusion )
FIR को cancel करना एक कानूनी तरीके से प्रक्रिया है, जिसे सही तरीके से किया जाता है।
ध्यान दे की FIR को सिर्फ High Court ही रद्द कर सकती है पुलिस केवल closure report ही दे सकती है समझौते के बाद भी कोर्ट से परमिशन लेना जरूरी होता है अगर आपका केस सही है और आप अपनी तरफ से clear है और आपका कानूनी तरफ से आधार मजबूत है, तो FIR को सफलता के साथ सफलतापूर्वक रद्द किया जा सकता है।
FAQs
Q1: क्या FIR को वापस लिया जा सकता है?
FIR को वापस court के माध्यम से ले सकते है सीधे वापस नहीं ले सकते
Q2: क्या पुलिस FIR मिटा सकती है?
पुलिस FIR को मिटा नहीं सकती है क्यूंकि ये FIR रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है
Q3: क्या compromise से FIR खत्म हो जाती है?
केवल High court के आदेश पर ही FIR को खत्म किया जा सकता है
Q4: क्या बिना कोर्ट जाए FIR cancel हो सकती है?
नहीं बिना कोर्ट जाये FIR नहीं रद्द की जा सकती है
Q5: क्या online के माध्यम से FIR cancel हो सकती है?
नहीं, सिर्फ कोर्ट के माध्यम से ही FIR cancel की जा सकती है
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