Search

अगर पुलिस FIR न लिखे तो क्या करें और क्या उनके खिलाफ करवाई की जा सकती है ?

भारत में कानून व्यवस्था को बनाए रखने का काम प्रशासन का होता है। जब किसी व्यक्ति के सार्वजनिक अधिकारों पर रोक लगाता है या उसके साथ कोई अपराध करता है तो उसका पहला कदम होता है की पुलिस में शिकायत दर्ज करवाए जिसे FIR (First Information Report) कहा जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पुलिस  सीधे तोर पर आसानी से FIR दर्ज  नहीं करती है हालांकि ज्यादातर आपराधिक मामलो में पुलिस या प्रशासन शिकायत दर्ज करने से मन कर देता है ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा समस्या आम लोगों को होती है। 

इस लेख में आपको विस्तार से समझाऊंगा की अगर पुलिस वाले FIR दर्ज न करे तो आपको क्या करना चाहिए और आपके क्या अधिकार हैं, और पुलिस के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

 

सबसे पहले तो समझ लेते है FIR होती क्या है ? 

FIR का मतलब होता है First Information Report यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट। यह वह दस्तावेज होता है जिसमें किसी अपराध (Cognizable Offence) की सूचना पुलिस को दी जाती है। 

 

अपराध क्या होते हैं? 

अपराध वे होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति के सार्वजनिक अधिकारों को रोका गया हो या उसके साथ कोई दूरव्यव्हार करता है तो ऐसी क्रिया अपराध के श्रेणी में आते है जो की निम्नलिखित है जैसे: 

  • हत्या 
  • चोरी 
  • बलात्कार 
  • अपहरण 
  • धोखाधड़ी 
  • अधिकारों का खनन आदि 

ऐसी कोई भी कार्य होने पर या देश या व्यक्ति के साथ होने पर वह व्यक्ति पुलिस में FIR दर्ज करवा सकता है और अपराधी को उसके कार्य की सजा दिलवा सकते है   

 

भारत में कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपराध के होने की कोई जानकारी देता है, तो पुलिस को उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके लिए FIR  को दर्ज करना आवश्यक है।  

 

इससे जुड़े हुए संबंधित कानून: 

  • CrPC की धारा 154: यह धारा कहती है कि पुलिस को FIR दर्ज करना अनिवार्य है।  
  • अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर देती है या दर्ज नहीं करती , तो यह कानून का उल्लंघन है। 

 

 

पुलिस FIR दर्ज क्यों नहीं करना चाहती या क्यों नहीं करती? कई बार पुलिस की प्रसाशन FIR दर्ज करने से बचती है। इसके पीछे कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं: 

  • अपराध को छोटा समझना 
  • राजनीतिक या सामाज की ओर से दबाव  
  • अपराध की संख्या को कम दिखाना  
  • अपराधी का पलड़ा भारी होना  
  • पुलिस की तरफ से लापरवाही या छूट  

 

लेकिन इनमे से कोई भी कारण FIR को दर्ज करने से नहीं रोक सकता यह सारे कारण सही आधार नहीं है। 

 

अब मै आपको वह सभी उपाए बताऊंगा आप उन् सबको विस्तार से जानिये जो आप अपना सकते हैं: 

1. पुलिस अधिकारी को अपनी शिकायत लिख कर दें 

  • सबसे पहले आपको ये काम करना है  
  • अपनी शिकायत को लिख कर दे  
  • उसकी एक कॉपी करवा कर अपने पास रखें 
  • उस लिखित शिकायत की कॉपी प्राप्त जरूर करे  

 

2. उच्च अधिकारी से संपर्क जरूर करें 

अगर पुलिस थाना FIR दर्ज करने से मन कर देता है , तो आप उच्च अधिकारियों के पास जा सकते हैं: 

  • SP (Superintendent of Police) 
  • SSP (Senior Superintendent of Police) 
  • DIG 

 

आप अपनी शिकायत को उच्च अधिकारी तक - पोस्ट द्वारा भेज सकते हैं या ईमेल भी कर सकते हैं  CrPC की धारा 154(3) के तहत आप सीधा SP को शिकायत देने का भी अधिकार रखते है। 

 

3. आप न्यायालय से मदत ले सकते है  

 

अगर पुलिस फिर भी कार्रवाई नहीं करती या FIR दर्ज नहीं करने से मन कर देती है , तो आप अदालत जा सकते हैं। 

 

(A) मजिस्ट्रेट के पास शिकायत ले जा सकते है  - CrPC की धारा 156(3) के तहत आप मजिस्ट्रेट से FIR दर्ज       कराने का आदेश दिलवा सकते हैं। 

(B) प्राइवेट कंप्लेंट - आप सीधे मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं 

 

4. ऑनलाइन FIR दर्ज करें 

  • आजकल कई राज्यों में ऑनलाइन FIR की सुविधा उपलब्ध है। 

  • जिस राज्य मै रहते है उस राज्य पुलिस की वेबसाइट पर जा सकते हैं ऑनलाइन शिकायत को दर्ज करवा सकते हैं 

5. पुलिस हेल्पलाइन और पोर्टल 

आप निचे दिए गए निम्न माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं: 

  • 112 (आपातकालीन नंबर) 

  • 1091 (महिलाऔ के लिए  हेल्पलाइन) 

  • राज्य पुलिस ऐप 

 

6. मानवाधिकार आयोग में शिकायत 

  • अगर पुलिस आपकी बात नहीं मान रही है, तो आप पुलिस के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं: 
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) 
  • राज्य मानवाधिकार आयोग 

 

7. मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा 

आज के समय में: 

  • इंस्टाग्राम  
  • ट्विटर (X) 
  • फेसबुक 
  • न्यूज मीडिया 

 

इन माध्यमों से भी व्यक्ति पुलिस पर अपना दबाव बना सकता है। 

 

पुलिस के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है? 

FIR दर्ज नहीं करती या दर्ज करने से मन कर देती है , तो पुलिस के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।  

 

1. विभागीय कार्रवाई 

  • पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच हो सकती है 
  • सस्पेंशन या ट्रांसफर भी किया जा सकता है 

 

2. अदालत की अवमानना  

  • अगर अदालत के आदेश के बाद भी FIR दर्ज नहीं होती, तो यह अवमानना है। 

 

3. IPC के तहत कार्रवाई 

कुछ कार्येवाही में पुलिस अधिकारी पर IPC की धाराएं लग सकती हैं: 

  • अपने काम के दौरान लापरवाही करना  
  • अपने उच्च अधिकार के अधिकारों का गलत इस्तेमाल करना  

 

4. RTI का उपयोग 

आप RTI लगाकर पूछ सकते हैं: 

  • आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? 
  • सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय 

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कई बार दर्शाया है कि FIR दर्ज करना आवश्यक है। 

 

प्रमुख केस: Lalita Kumari vs Government of UP (2013) 

इस केस में कोर्ट ने कहा था की FIR दर्ज करना अनिवार्य है जांच बाद में भी की जा सकती है FIR दर्ज करने से आपके अधिकार जुड़ जाते है और आपको यह अधिकार हैं: FIR की कॉपी को आप मुफ्त में ले सकते है  महिला की शिकायत को महिला पुलिस के द्वारा दर्ज होना चाहिए रात में भी FIR दर्ज होनी चाहिए।  

 

आपको यह अधिकार हैं: 

  • FIR की कॉपी को आप मुफ्त में ले सकते है  
  • महिला की शिकायत को महिला पुलिस के द्वारा दर्ज होना चाहिए  
  • रात में भी FIR दर्ज होनी चाहिए।  
  • जीरो FIR दर्ज करना 

 

जीरो FIR क्या है? 

जीरो FIR का क्या मतलब है: 

  • आप किसी भी थाने में FIR दर्ज कर सकते हैं 
  • भले ही घटना उस क्षेत्र में न हुई हो 
  • FIR दर्ज कराने के दौरान ध्यान रखने वाली बात ये है की  
  • पूरी घटना को स्पष्ट तरीके से लिखें 
  • तारीख, समय, स्थान को सही तरीके से दर्शाये 
  • गवाहों के नाम दें 
  • सबूत संलग्न करें 
  • आम गलतियां जो लोग करते हैं 
  • केवल मौखिक शिकायत करना 
  • रिसीविंग न लेना 
  • देरी करना 
  • अधूरी जानकारी देना 

 

निष्कर्ष 

अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं करती, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कानून आपके साथ है। आप कई कानूनी उपायों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे उच्च अधिकारियों से शिकायत, कोर्ट का सहारा, या मानवाधिकार आयोग में जाना। 

 

 

 

Prem Singh

Prem Singh

Hi, I’m Gene Gleason, Your Blogging Journey Guide 🖋️. Writing, one blog post at a time, to inspire, inform, and ignite your curiosity. Join me as we explore the world through words and embark on a limitless adventure of knowledge and creativity. Let’s bring your thoughts to life on these digital pages. 🌟 #BloggingAdventures

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy