सीधा जवाब है अगर कहु तो — पुलिस हर situation में आपका फ़ोन चेक नहीं कर सकती ।
कानून के हिसाब से BNS की धारा 185 जो की पहले CrPC की धारा 165 थी इस धारा के तहत पुलिस बिना warrant search तभी कर सकती है, जब उन्हें शक हो की उसके पास उसके फ़ोन में अपराध से जुड़े सबूत है जो की warrant लेने के लिए इंतज़ार करेंगे तो मौजूदा सबूत मिट सकते है
लेकिन अगर बात करि जाये की आप रोड पर चल रहे हो ! और पुलिस road पर आपको रोककर बिना किसी वजह के कहे कि अपना phone dikhao, chats dikhao, gallery kholo, तो यह हमेशा सही नहीं माना जाता। फ़ोन चेक करने के लिए पुलिस के पास कोई valid legal रीज़न होना चाहिए , कंप्लेंट होनी चाहिए , या investigation का आधार होना चाहिए।
लेकिन अगर किसी crime का शक हो — जैसे cyber fraud, blackmail, धमकी, cheating, या किसी criminal case से जुड़ा कोई evidence phone में होने का शक हो — तब पुलिस बिना warrant के भी बंस की धारा 106 के तहत आपका phone check या seize कर सकती है।
लेकिन Article 21 का fundamental right के तहत आपका phone आपकी privacy का हिस्सा है
इसलिए आप politely उनसे पूछ सकते हैं: “Sir, kis dhara ya kis आधार par phone check करने के लिए कह रहे हो?
और Kya koi complaint ya case registered hai?”
याद रखिए, बिना वजह randomly कोई भी आपका फ़ोन चेक नहीं कर सकता है ये आपकी प्राइवेसी का हिस्सा है
क्या पुलिस बिना warrant के आपका phone check कर सकती है?
सीधा जवाब है अगर कहु तो — पुलिस हर situation में आपका फ़ोन चेक नहीं कर सकती ।
कानून के हिसाब से BNS की धारा 185 जो की पहले CrPC की धारा 165 थी इस धारा के तहत पुलिस बिना warrant search तभी कर सकती है, जब उन्हें शक हो की उसके पास उसके फ़ोन में अपराध से जुड़े सबूत है जो की warrant लेने के लिए इंतज़ार करेंगे तो मौजूदा सबूत मिट सकते है
लेकिन अगर बात करि जाये की आप रोड पर चल रहे हो ! और पुलिस road पर आपको रोककर बिना किसी वजह के कहे कि अपना phone dikhao, chats dikhao, gallery kholo, तो यह हमेशा सही नहीं माना जाता। फ़ोन चेक करने के लिए पुलिस के पास कोई valid legal रीज़न होना चाहिए , कंप्लेंट होनी चाहिए , या investigation का आधार होना चाहिए।
लेकिन अगर किसी crime का शक हो — जैसे cyber fraud, blackmail, धमकी, cheating, या किसी criminal case से जुड़ा कोई evidence phone में होने का शक हो — तब पुलिस बिना warrant के भी बंस की धारा 106 के तहत आपका phone check या seize कर सकती है।
लेकिन Article 21 का fundamental right के तहत आपका phone आपकी privacy का हिस्सा है
इसलिए आप politely उनसे पूछ सकते हैं: “Sir, kis dhara ya kis आधार par phone check करने के लिए कह रहे हो?
और Kya koi complaint ya case registered hai?”
याद रखिए, बिना वजह randomly कोई भी आपका फ़ोन चेक नहीं कर सकता है ये आपकी प्राइवेसी का हिस्सा है
ऐसी legal जानकारी के लिए Ivnap Legal Advice channel को follow जरूर करें।
Leave a comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *